बिल्व गर्मियों में सेहत के लिए अमृत है। यह फल कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। बिल्व संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसे साधारण बोलचाल में बेल कहा जाता है। बेल सबसे ज्यादा दक्षिणी एशिया के देशों में पाया जाता है। भारत के सभी क्षेत्रों में, विशेषकर तराई में समुद्र की सतह से 4000 फीट तक की ऊंचाई पर इसके पेड़ पाए जाते हैं।
शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव इस पेड़ की जड़ों में वास करते है। सावनके महीने में इसीलिए भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाए जाते है। सावन माह मेंशिवलिंगों पर गंगाजल और दूध के साथ चढ़ाया जाता है।
- बेल के फलों में बिल्वीन नाम या मार्मेसोलिन नामक तत्व एक प्रधान सक्रियघटक होता है। इसके अतिरिक्त गूदे में लबाब, पेक्टिन, शर्करा और तेल पाएजाते हैं। ताजे पत्तों से मिला हुआ रस हरे रंग का और सुगंधित होता है।
- इसका कच्चा फल पाचनशक्ति बढ़ाने वाला, खून बढ़ाने वाला, मीठा होता है। इसके पत्तों का रस घाव ठीक करके दर्द दूर करता है। बुखार मिटाता है, जुकामऔर सांस रोग मिटाने और मूत्र में शर्करा कम करने वाला होता है। इसकी छाल औरजड़ घाव, कफ, बुखार, गर्भाशय का घाव, नाड़ी अनियमितता,दिल की बीमारियां आदि दूर करने में सहायक होती है।
बेल का गुदा आंतों की बीमारी में रामबाण औषधि है। प्राचीन आयुर्वेदिकग्रन्थ, चरक संहिता तथा सश्रुत संहिता, में इसके बारे में विस्तृत वर्णन मिलता है। अतिसार (डायरिया), पेचिस (डीसेनटरी) और अमीबियोसिस में ये तुरन्त लाभकारी होता है। इसकी तासीर ठण्डी होती है। इसलिए गर्मियों में लू लग जाने पर इसका जूस पिलाने से रोगी को तुरंत राहत मिलती है।
- बेल में कई विशिष्ट अल्कलाईड यौगिक व खनिज लवण पाए जाते हैं, जो भूख व ऊर्जा को बढ़ाते हैं और बीमारियो को दूर कर देते हैं।
-प्राचीन समय में जब आज की तरह सीमेंट नहीं बनता था तो मकानों को मजबूती देने व जलरोधी बनने के लिए बेल के गूदे को चूने में मिलाकर भी लगाया जाता था।
- गर्मियों में रोज बेल का शर्बत पीने से ठंडक और ताजगी मिलती है। साथ ही, पेट से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।
- इसमें 31.8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 0.3 ग्राम फैट्स, 1.8 ग्राम प्रोटीन, विटामिन ए,बी,सी, थाइमाइन, राइबोफ्लोबिन, 85 मिलीग्राम कैल्शियम, 600 मिलीग्राम पोटैशियम, 61.5 ग्राम फाइबर और 137 के कैलोरी ऊर्जा है।
- बेल में फेनोलिक तत्व के साथ ही भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये फल एंटीऑक्सीडेंट दूर करने में मददगार होते हैं। इतना ही नहीं, इसके सेवन से पेट में एसिड का संतुलन भी बना रहता है।
- बेल में कई तरह के एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। इसीलिए यह शरीर से हर तरह के संक्रमण को दूर कर देता है।
- बेल के पत्तों का जूस कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने में मददगार होता है। रोज इसके पत्ते खाकर भी कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है।
- दमा के रोगियों के लिए भी बेल बहुत फायदेमंद होता है। बेल का तेलइस्तेमाल करके दमा और सांस से जुड़े रोगों का इलाज किया जा सकता है।
- बेल के रस को घी के साथ मिलाकर लें। इससे दिल से जुड़े रोगों से बचा जा सकता है। बेल का शर्बत भी दिल से संबंधित बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए बहुत अच्छा होता है।
- बेल डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभदायक होता है। यह शरीर में ब्लड शुगरके स्तर को नियंत्रित करता है। यह इन्सुलिन बनाने में मददगार है जिससे डायबिटीज मे आराम मिलता है।

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