पुदीना एक छोटा सा पौधा होता है जो अक्सर नमी वाली भूमि पर उगता हुआपाया जाता है। इसमें उड़नशील तेल पाया जाता है जो पिपरमिंट जैसी सुगंध देताहै। इसका वानस्पतिक नाम मेन्था स्पीकेटा है। वनांचलों में आदिवासी इसकाइस्तेमाल कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के निदान के लिए करते हैं, चलिए आजजानते हैं पुदीना से जुड़े आदिवासी हर्बल ज्ञान और कुछ हर्बल नुस्खों केबारे में..
- पातालकोट के आदिवासियों के अनुसार बिच्छू के काट लेने पर पुदीना रामबाणदवा का काम करता है। पुदीने की पत्तियों का रस या पत्तों को पान में डालकरखाने से लाभ होता है और धीरे-धीरेे जहर उतर जाता है।
पुदीना के संदर्भ में रोचक जानकारियों का जिक्र कर रहें हैं डॉ. दीपकआचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों, जैसे पातालकोट (मध्यप्रदेश), डांग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों केपारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहे हैं।
पुदीने की कुछ पत्तियों को कुचलकर इसमें तीन बूंद नींबू का रस डाललें। इस मिश्रण को कील मुंहासों पर लगाएं। 5 मिनट बाद चेहरा धो लें। एक सप्ताह में ही मुहांसे और कील खत्म हो जाएंगे और चेहरा चमकने लगेगा।
- सर्दी और जुकाम होने पर पुदीने की पत्तियों के रस की एक-एक बूंद नाक में डालने से लाभ होता है।
- काली मिर्च, पुदीना और नमक का मिश्रण एक साथ चबाने से भी सर्दी में तेजी से फायदा होता है।
पुदीने की पत्तियों का रस और अदरक के रस की समान मात्रा मिलाएं। इस मिश्रण को लेने से बुखार में आराम मिलता है।
- आदिवासियों के अनुसार करीब एक गिलास पानी में 10 पुदीने की पत्तियां, थोड़ी-सी काली मिर्च और थोड़ा काला नमक डालकर उबालें।
- पांच मिनट उबालने के बाद इस पानी को छानकर पीने से सर्दी खांसी, जुकाम और बुखार से आराम मिलता है।
- आदिवासियों के अनुसार करीब एक गिलास पानी में 10 पुदीने की पत्तियां, थोड़ी-सी काली मिर्च और थोड़ा काला नमक डालकर उबालें।
- पांच मिनट उबालने के बाद इस पानी को छानकर पीने से सर्दी खांसी, जुकाम और बुखार से आराम मिलता है।
पुदीने की सूखी पत्तियों को पीसकर चूर्ण बनाएं। इस चूर्ण से दांतों को साफ करें। ऐसा करने से मुंह की
दुर्गंध दूर होती है और मसूड़े भी मजबूत होते हैं।
- पेटदर्द और अतिसार में इसके पत्तों को अनार दानों के साथ पीसकर अदरक के रस में मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।
- पेटदर्द और अतिसार में इसके पत्तों को अनार दानों के साथ पीसकर अदरक के रस में मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।
कोलेरा होने पर 6 ग्राम पुदीने की पत्तियां और इलायची (3 ग्राम) लेकरआधा लीटर पानी में उबाल लें। एक-एक घंटे के अंतराल से इसे रोगी को दें।इससे उल्टी बंद हो जाती है। साथ ही, पेटदर्द में भी आराम मिलता है।
- दाद या त्वचा पर सूक्ष्मजीव संक्रमण होने पर पुदीना के पत्तों का रस दिन में 3-4 बार लगाएं। जल्दी आराम मिलेगा।
- दाद या त्वचा पर सूक्ष्मजीव संक्रमण होने पर पुदीना के पत्तों का रस दिन में 3-4 बार लगाएं। जल्दी आराम मिलेगा।
- पत्तियों को कुचलकर सीधे त्वचा पर रगड़ा जाए तो भी फायदा होता है।
नमक के पानी के साथ पुदीने के रस को मिलाकर कुल्ला करें तो गले की खराश और आवाज का भारीपन दूर हो जाता है। आवाज साफ हो जाती है।
- एक गिलास पानी में 8-10 पुदीने की पत्तियां, थोड़ी-सी काली मिर्च और जरा सा काला नमक डालकर उबालें। 5-7 मिनट उबालने के बाद पानी को छानकर पिएं, खांसी, जुकाम और बुखार से राहत मिलेगी।
पुदीना हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाता है, यह दर्द को भी खत्म करता है। साथ ही, पाचन क्रिया को सुधरता है और भोजन को पचाने में भी मदद करता है।
- जिन लोगों को गैस व एसिडिटी की समस्या रहती है, उन्हें खाने के बाद एक कप पुदीना चाय पीना चाहिए। इससे पेट दर्द, गैस व एसिडिटी जैसी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
- बस, कार और ट्रेन में चक्कर और मतली कि परेशानी होती है तो इससे बचने केलिए घर से निकलने से पहले एक कप पुदीने की गर्म चाय पीना चाहिए।
पुदीने की चाय के नियमित इस्तेमाल से बाल खूबसूरत होने लगते हैं। इसकीचाय में कुछ ऐसे भी गुण होते हैं, जिससे बाल चमकीले और घने हो जाते हैं।
- गर्मी के मौसम में लू लगने से बचने के लिए पुदीने की चटनी को प्याज डालकरबनाएं। अगर इसका सेवन नियमित रूप से किया जाए तो लू लगने की आशंका खत्म होजाती है।
पुदीना पिंपल्स में बहुत लाभदायक होता है। इसमें मेंथोल होता है जोत्वचा को ठंडक देता है, इसकी शीतलता तैलीय त्वचा को सॉफ्ट बना देती है।
- स्किन पर जलन की समस्या में पुदीना चाय दवा का काम करती है। यह चकत्ते, जलन, कीड़े के काटने, खुजली और त्वचा में सूजन जैसी त्वचा समस्याओं का इलाजकरने में भी सहायक है।

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